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Showing posts from July, 2015

हम/ मैं / तूं /......

चल तुजे एक खुशखबरी सुनाता हूँ. अब उन सब बातोंमें मत जाना के इतने दिन कहाँ था ? क्या किया? तुजे तो पता है लॉस्ट हो जाना अब मेरा पात्र है. तुजिसे जो सिखा है. पर इस बार में लॉस्ट होने को नहीं गया था. इलाज के लिए गया था. फोन लगाने से पहले एक बार पूरा पढ़ ले. में अभी ठीक हूँ और ये इलाज बहोत इमोशनल लेवल पे है न के फिजिकल, तोह की चिंता मत कर. दरअसल पक चूका हूँ , मर चुका हूँ, और मुझे जीना है. में मानता हूँ के प्यार दुनियाकी सबसे खुबसूरत चीज़/ईमोशन है , लेकिन ये ही सबसे भद्दा भी है. में मानता हु अगर किसी से प्यार करो तो टूट के करो, पूरी शिद्दत से करो लेकिन ये ऊम्मीद मत रखोकी वो भी तुमसे इतना ही प्यार करे. अब ये जो सेकंड पार्ट है उम्मीद वाला वो साला डिफिकल्ट है. इतने साल तो कोई ख़ास दिक्कत नहीं हुई पर अब हो रही है. शायद में इनसिक्योर हो गया हूँ एसा मान सकती हो. पर कोई उम्मीद न रखना पोसिबल नहीं है, कुछ समय के बाद कुछ टूटने लगता है , आईने जेसा, और उस काच के टूकडे अंदर से चुभने लगते. और खून साला आँखों से निकलता है.  में अब इंतजार नहीं कर सकता, इसका मतलब ये नहीं है के कोई जवाब या रिएक्शन चाहता हू...