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પોપકોર્ન -

નોંધ : આજે જે લખવું છે એ માત્ર ફિક્શનલ, પેહલો વિચાર છે , કોઈના ફોર્મેટ કે આઈડિયાનું મજાક બનાવવા કે હાની પહોચાડવાની કોઈ જ વૃતી નથી . છેલ્લા થોડા સમય થી હું લપ્રેક (લઘુ પ્રેમ કથા) વાંચી રહ્યો છું જે એક નવું ફોર્મેટ છે મારી જાણ છે ત્યાં સુધી ૩ પુસ્તક બહાર આવ્યા છે , અને મને ત્રણેવમાં ખુબ મજા પડી છે , સાચે તો મને ફોરમેટમાં જ મજા પડી છે. (જબરા ફેન ફીલિંગ ) લઘુ પ્રેમ કથા, આજ ના સમય માં એકદમ સાંપ્રત વાત છે, આજ કાલથી પ્રેમ કથાઓ લઘુ જ હોય છે. (અપવાદ બધે જ હોય છે). હવે એ ઉપર થી વિચાર આવ્યો કે જો લપ્રેક ગુજરાતીમાં અમદાવાદના બેકડ્રોપમાં લખાય તો સખત ફની થઇ જાય અને એના ઉપર થી આ એક વિચાર આવ્યો જે પેહલો વિચાર જ છે જે શેર કરી રહ્યો છું.  લપ્રેક ૧  પોપકોર્ન એ બેવ એક એવી ફિલ્મ જોવા માટે સીનેપોલીસ ગયા જેની સાથે એમને સીધા કે આડકતરા કોઈ લેવા દેવા નોહતા. એમને એટલી ખબર હતી કે આ ફિલ્મ જોવા ખુબ ઓછા લોકો આવે છે. અલ્ફા મોલ જેવી જગ્યા ઉપર ભીડ સારી એવી હોય છે એકલામાં પકડાઈ જવા કરતા ભીડ માં ખોવાઈ જવું, એ એને સારો ઓપ્શન લાગ્યો. બેવ જણ કોર્નર સીટ ની ટીકીટ લઇ ને પોપકોર્ન લેવા ગયા. ...

हम/ मैं / तूं /......

चल तुजे एक खुशखबरी सुनाता हूँ. अब उन सब बातोंमें मत जाना के इतने दिन कहाँ था ? क्या किया? तुजे तो पता है लॉस्ट हो जाना अब मेरा पात्र है. तुजिसे जो सिखा है. पर इस बार में लॉस्ट होने को नहीं गया था. इलाज के लिए गया था. फोन लगाने से पहले एक बार पूरा पढ़ ले. में अभी ठीक हूँ और ये इलाज बहोत इमोशनल लेवल पे है न के फिजिकल, तोह की चिंता मत कर. दरअसल पक चूका हूँ , मर चुका हूँ, और मुझे जीना है. में मानता हूँ के प्यार दुनियाकी सबसे खुबसूरत चीज़/ईमोशन है , लेकिन ये ही सबसे भद्दा भी है. में मानता हु अगर किसी से प्यार करो तो टूट के करो, पूरी शिद्दत से करो लेकिन ये ऊम्मीद मत रखोकी वो भी तुमसे इतना ही प्यार करे. अब ये जो सेकंड पार्ट है उम्मीद वाला वो साला डिफिकल्ट है. इतने साल तो कोई ख़ास दिक्कत नहीं हुई पर अब हो रही है. शायद में इनसिक्योर हो गया हूँ एसा मान सकती हो. पर कोई उम्मीद न रखना पोसिबल नहीं है, कुछ समय के बाद कुछ टूटने लगता है , आईने जेसा, और उस काच के टूकडे अंदर से चुभने लगते. और खून साला आँखों से निकलता है.  में अब इंतजार नहीं कर सकता, इसका मतलब ये नहीं है के कोई जवाब या रिएक्शन चाहता हू...

माफीनामा

में बहोत थक चूका हु, अब बर्दास्त नहीं होता. तुम ये मत समजना के तुम्हारी वजह से ये सब लिख रहा हु. नहीं. मेने पहले भी कहा था के ये मेरी समस्या है और मेरी ही रहगी. हा , पर अब तक ये समस्या, जो मुझे आज से पहले समस्या नहीं लगी है वो मुझे दिक्कत दे रही है. पता नहीं लेकिन पिछेले कुछ दिनों से वो समस्या लग रही है. (शायद ये सुन के तुमको ख़ुशी भी हो ) पता नहीं पर एसा लगा रहा है मे जिन्दा नहीं हु , मेरे जिन्दा होने का एहसास में खो रहा हु. सिर्फ साँस लेना ही जिंदा होना नहीं है. ये बात तो में कुछ साल पहले वेंटिलेटर नाम के एक मशीन ने सिखा दी थी. खेर वहा नहीं जाते. दिक्कत ये है की अब थकान रहती है थोड़ीसी. ये इंतज़ार की वजह से नहीं. और ना ही एसी कोई उम्मीद जाग गई है के जिसके कारन तुम्हे  डर/दुविधा/चिंता एसा कुछ भी हो. पर तेरे न होने की कमी खुछ ज्यादा ही खलती है.  हां मुझे पता है तुम एसी ही हो. शिकायत नहीं कर रहा , हमारे रिश्ते में इसकी गुंजाईश नहीं है. रिश्ता ? हां रिश्ता. कभी कभी हम अपनी पसंद की जगह पर चाय या कोफ़ी के लिए जाते है और जिस टेबल पे हम रोज बैठते है , उस पर एक द...

Life Fiction 2.0

It was a cold winter night in Ahmadabad . There was something unusual with the street lights. And I was not alone at local “tapari”, there was nothing unusual about it.  I was sitting there and having my routine evening chaay and cigarette.   Under a tree, not very far from me there were two boys and one of them was a great writer and critic (according to him). He was shouting, or I felt so. He was cribbing about a play. He abused the writer then came to director. i was done with my  two chaay and two milds and he was still abusing the director and his all recent production, then he came to the actor, and again he goes on and on. His voice was louder then before or I thought so. He said the actor was stupid, full, beep beep and immature beep and beep and one more thing beep. I was getting late. I went to that boy (self proclaimed critic, other one was just listing. I guess, this kind of people need someone for their mental masturbation, poor other guy) and said “...

Life fiction

I want everything. I want to play hero as badly as I want to play villain. I want my name in every project I hear. I want to leave every project. I want to run away. You can cut may toes eventhen I will run. I will run behind something(someone), don't ask me who is he/she or what is it as I don't know. But I want everything and I want to quit everything.

खोफ

आज कल रहेता है थोडा सा, अंजान परींदे को प्यार करने का खोफ, प्यार करने के बाद रात का खोफ, जैसे अमावस की रात को सूरज का खोफ, आज कल रहता है थोडासा , साँस लेने का खोफ मेरे पते पे किसी ख़त के आने का खोफ, पुरानी एक प्यारी याद का खोफ, जैसे बूढ़े चूहे को भूखी खूंखार बिल्ली का खोफ, आज कल थोड़ासा रहता है , मेरा अपने जेसे होने का खोफ, तेरी आँखों में खुद को ना देख पाने का खोफ , जवान दिल को बूढ़े शरीर का खोफ, शाखों को पतजढ का खोफ, जैसे हर सिगरेट को जेसे आग का खोफ, नींद को सपनो का खोफ , सपनों को काच का खोफ, काच को भरोसे का खोफ , भरोसे को नींद का खोफ , जेसे हर रूह को परछाई का खोफ, आज कल रहता है थोड़ासा, जीने का खोफ

हकीकत

वो आसमा भी क्या ,वो ‌‍जमीं भी क्या जमीन है जिस्मो की कब्रमें जहा बस रूह जमी है ..वो आसमाँ आग में जली हो या , मिट्टी में दफ़न हो ये जिदगी भी क्या है , थोड़ी हड्डी है थोड़ी चमड़ी ....वो आसमाँ भी चांदी की उन रातो में अब तपिश बहोत रहती है तारे भी अब छुप गए है सुरज की करवट में .......वो आसमाँ भी गर्म सडको पे ठंडी सांसे जमी रहती है अब तो ख्वाइशेंभी पतरे के डिब्बोंमें कद रहती है .... वो आसमाँ भी