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Life fiction

I want everything. I want to play hero as badly as I want to play villain. I want my name in every project I hear. I want to leave every project. I want to run away. You can cut may toes eventhen I will run. I will run behind something(someone), don't ask me who is he/she or what is it as I don't know. But I want everything and I want to quit everything.

खोफ

आज कल रहेता है थोडा सा, अंजान परींदे को प्यार करने का खोफ, प्यार करने के बाद रात का खोफ, जैसे अमावस की रात को सूरज का खोफ, आज कल रहता है थोडासा , साँस लेने का खोफ मेरे पते पे किसी ख़त के आने का खोफ, पुरानी एक प्यारी याद का खोफ, जैसे बूढ़े चूहे को भूखी खूंखार बिल्ली का खोफ, आज कल थोड़ासा रहता है , मेरा अपने जेसे होने का खोफ, तेरी आँखों में खुद को ना देख पाने का खोफ , जवान दिल को बूढ़े शरीर का खोफ, शाखों को पतजढ का खोफ, जैसे हर सिगरेट को जेसे आग का खोफ, नींद को सपनो का खोफ , सपनों को काच का खोफ, काच को भरोसे का खोफ , भरोसे को नींद का खोफ , जेसे हर रूह को परछाई का खोफ, आज कल रहता है थोड़ासा, जीने का खोफ

हकीकत

वो आसमा भी क्या ,वो ‌‍जमीं भी क्या जमीन है जिस्मो की कब्रमें जहा बस रूह जमी है ..वो आसमाँ आग में जली हो या , मिट्टी में दफ़न हो ये जिदगी भी क्या है , थोड़ी हड्डी है थोड़ी चमड़ी ....वो आसमाँ भी चांदी की उन रातो में अब तपिश बहोत रहती है तारे भी अब छुप गए है सुरज की करवट में .......वो आसमाँ भी गर्म सडको पे ठंडी सांसे जमी रहती है अब तो ख्वाइशेंभी पतरे के डिब्बोंमें कद रहती है .... वो आसमाँ भी

નનામી

આજે જે કઈ પણ લખી રહ્યો છું એ વાર્તા , કલ્પના કે ફિક્શન નથી બસ લાગણીઓ છે, એના કરતાં પણ સ્પષ્ટ કહું તો માત્ર ગુસ્સો. બે એક દિવસ થી કામમા હતો એટલે ન્યુઝ જોઈ શકતો નોહ્તો માટે આજે સવારે ન્યુઝ જોયા ત્યારે ફરી થી લોકો રસ્તા ઉપર ભેગા થઇ ગયા હતા, વાત એ જ્ હતી પણ કદાચ એ મારા માટે પેહલા કરતાં પણ વધારે ક્રૂર હતી ,  ફરી એ જ્ શહેર. અને આ વખતે વિક્ટમ એક પાંચ વર્ષ ની છોકરી,  સાચું કહું છું રુવાંટા ઉભા થઇ ગયા હતા, પેહલા બે ત્રણ મીનીટ તો ન્યુઝ વાળા બીજુ શું બોલ્યા કઈ જ્ ખબર નથી પણ હા પછી ખબર પડી કે કોઈ ડીબેટ ચાલી રહી હતી , એ જ્ બધું પોલીસ રિપોટ નોહતી લખી રહી. કોઈક એમ એલ એ  એમ પણ કહ્યું કે આ તો પોલીટીક્સ થઇ રહી છે, ગાળ બોલવા ની ઈચ્છા થઇ ગઈ હતી , ઈનફેક્ટ બોલી પણ ગયો હતો, એક બાજુ આવી ઘટના બની ગઈ છે અને બીજી બાજુ એ લોકો  ને પોતાની પોલીટીક્સ સિવાય બીજું કઈ સુજતું નથી . પછી યાદ આવ્યા એ આંકડા જે ગેંગ રેપ્ વખતે સાંભળ્યા હતા , ૨૦૧૨ મા ૨૧૦૦૦ રેપ કેસ  નોધાયા હતા , રાજધાની દિલ્લી મા કઈ ૬૦૦ ઉપર્ કેસ નોધાયા અને એમાં થી માત્ર એક નું જ્ નિરાકરણ આવ્યું છે. અને આ માત્ર નોધાયેલા કેસ છે આ...

मुलाकात

पहेले की तरह बस एक रोज फिर आ जाओ , यादो के कुछ पोधे मुरजा रहे है उन्हें पानी दे के चली जाना. आओ तो सरगोशी में जो गुफ्तगू किया करते थे उन्हें साथ ले आना ,  और किताबो के पीछे रक्खी हुई उन तिरछी नजरो को भी ले आना . तुम भलेही बात तक न करना मुजसे , में भी चुप चाप एक कोने में जाके बेठा रहूँगा . लेकिन तकिये से जरा बतिया लेना ,उसे जुकाम हुआ है . और जिस दीवार से पीठ लगा कर तूम फोन पे बाते किया करती थी उसे मिल लेना , आज कल वो बहोत अकेली पड गई है . रसोईघर की हर एक चीज़ मेरे खिलाफ मोरचा निकाल ने वाली है , उन्हें ज़रा समजाना के में अभी नया हू , सीख जाऊंगा . जुला , लेप्म , तुम्हारी वाली खुर्शी वो सब तो रूठे हुए परिवार वालो जेसे है सामने होते है पर बात कोई नहीं करता . और सर्दियों वाली रजाई निकाल के बस कुछ पल सोजाना. इतने स्पर्श छोड़ जाना के जो इस घर को तुम्हारे यहाँ होने का एहसास कराये. में तो आदत डालने की कोशिश कर रहा हू लेकिन , ये घर मानने को तैयार ही नहीं है, अगर मकान होता तो में समजा भी लेता. इसका मन रखने के खातिर ही सही पहेले की तरह बस एक रोज फिर आ जा...

में मर चूका हू

मुझे लगता है मेरे आस पास सब कुछ मर गया है सूरज की रौशनी से ले के मेह्बुब की  आँखों का नूर सब कुछ बेजान सा लगा रहा है पहले  जो संगीत हुआ करता था, एसी चिडियों की आवाझ से अब डर सा लगा रहता है, मुझे समज नहीं आ रहा था अब तक की क्या हो रहा लेकिन अब जाना है की दरसल में मर चूका हू. और फिर भी एक सवाल है जो  मुझे छोड़ नहीं रहा है में आखिर था  कोन ? में रचेयता था  , या में रचना था  ? में रौशनी था , या में अंधकार था  ? मेह्बुक की पुकार था , या मजलूम की चीख था  ? और मेने ऐसे किया तो क्या था के मरने के बाद भी मुझे चेन नहीं है . हमेशा जुंड में चला , जो समूह ने कहा वही मेरी आवाज थी , मेने सिर्फ अपनी परवाह की तो क्या गलत किया ? सूखे पेड से ले कर , जहरीले समन्दर तक में ये सब पूछ आया कसी ने मुझे कुछ नहीं कहा. शायद वो भी मेरे प्रतीक बन गए थे , अब वो भी सिर्फ अपनी ही परवाह कर रहे थे , पर एक लाश को मेरे पे रहेम आया. मेरे हर सवाल का जवाब देने वो लाश भगवान बन के आई थी बड़ी बेरुखी से बतलाया उसने में इन्सान था . में इन्स...

मोत

एक इंसान की मोत पूरे परिवार से जिंदगी छीन लेती है संफेद रंग में लिप्टा, काला अंधेरा घर की छत बनता है और ज़मीन तो कब की पैरों तले से खिसक चुकी होती है उस वक्त तुम न धरती पे होते हो आसमान में करोडो में सही लेकिन तुमने अपनी सांसो की गिनती शुरू कर दी होती है भावना और वास्विकता, सायन्स और श्रध्दा के बिच में लटके रहेते हो . प्यार , भावना, सवेदना इन सब शब्दों से भरोसा उठ जाता है अगर कोइ अपना लगता है तो वो होता है दर्द , दर्द, की जो अनंत होता है ,जो तुम्हे जड़ बना देता है , अब , सवाल ये उठता है के,   क्या इसके बाद भी तुम सच में जिंदा हो ? एक इंसान की मोत पूरे परिवार से जिंदगी छीन लेती है.