Skip to main content

Posts

मेरी महोब्बत उम्मीद से थी

एक ख़त भेजा था तुजे  मेरी महोब्बत उम्मीद से थी  डॉक्टर ने कहा उसे बचाने को तुजे बोलना होगा  पर दर्द इतना था मेरी महोब्बत का के बोल न पाया  कलम की सिगरेट बना के कागस पर धुआ छोड़ दिया  बड़ी मुश्किल से पता मिला उसका  जिसको मेरी महोब्बत भेजनी थी  गुलाबी रंग के लिफाफे में डाल के बड़ी सोच के बाद पोस्ट किया उसे  मेरी महोब्बत उम्मीद से थी  उसके अन्दर पल रहे जस्बात अब कभी कभी लात मार के मुझे हँसा देते थे  गुमने फिर ने में दिक्कत होने लगी  अब तो शारीर भी बोलने लगा था  मेरी महोबत उम्मीद से थी  आज एक गुलबी लिफाफा मुझे मिला , पर उसके पीछे मेरा पता लिखा था ......... आज फिर कमियाबी के लिफाफे में नाकामयाबी आई. मेरी महोब्बत का miscarriage हुआ है  मेरी महोब्बत उम्मीद से थी

ख़ामोशी

नजाने कोन सी ख़ामोशी है ये जो घर कर गई है , जमाना बीत गया, ट्रामे बस अब मेट्रो बन गई है , बड़ी सो balcony के सामने बड़ा बगीचा तो हम ने अब फिल्मो के लिए छोड़ दिया  है एक कटघरे में लगे २-४ गमलो से अपनी वादियाँ बनाली है हम ने पर ये ख़ामोशी तब भी थी और अब भी है बस शोर में कुछ घेहरी हो गई ये नजाने कोन सी  ख़ामोशी है जो घर कर गई है ......... उम्र जब जवान थी शायद तब वो नहीं थी या शायद थी? बगेर इस के लगता था की कुछ बाकि है मुजमे और इसके आने के बाद रहा ही नहीं है कुछ सिवाय उसके जब उस रात तुम आई  बारिश रुक चुकी थी एक अजीब सा सन्नटा था वहा पे पर तुम्हारी आवज में सुन नहीं पा रहा था शायद तुम कुछ बोली थी .?? मेरी सिसकियो की आहट में  तुम खामोश थी....... न जाने ये कोनसी ख़ामोशी है जो घर कर गई है

लगता है के रात बहोत हो चुकी

अब लगता है के रात बहोत हो चुकी  , beer की सारी बोत्तल अब फर्श पे अपना सर खोले पड़ी थी और चांदनी की हालत फेकी हुई आधी  जली सिगारेट के जेसी थी, लग तो रह था की अब बस रात ख़तम होने  को है   पर वो भी बड़ी कमीनी है पिछले कुछ सालो में वो कुछ ऐसी छा  गई है के  सूरज नामकी भी चीज़ होती है भूल गए है लोग पर अब लगता है रात बहोत हो चुकी है.   बहोत  हो चूका है अब अन्धकार  का राज , और बहोत सह चुके रात का वार सूरज को अब आना ही होगा ,  एक नयी चिंगारी  को जलना ही होगा , अब तो कुछ करना  ही होगा , इन्कलाब और क्रांति के नारों  को फिर से दहाड़ना होगा  एसा कह कर एक और beer की bottal ओंधे पेट गिर पड़ी  और धुए की एक और लकीर फिर से चल पड़ी ... लगता है के रात बहोत हो चुकी 

music of words

world

तू है तो है ज़िन्दगी .............

तू नहीं तो कुछ नहीं ज़िन्दगी, तू है तो है जिंदगी  तू मेरी दिलकशी है , तू मेरी बेखुदी है तू मेरी ज़िन्दगी है  तू है तो है ज़िन्दगी  अंधेरो में अब तक चला में , उजालो से डरा सा में , अकेला अब तक चला था में , मुजसे मिलने आई  जेसे तू रोशनी  सुबह क्या होती है जाना मेने , रिस्तो के पिटारे को खोला मेने , ज़िन्दगी को डोली में बिठाके लायी तू ] तू मेरी दिल्लगी , तू मेरी हर ख़ुशी, मेरी ज़िन्दगी है तू  तू है तो है ज़िन्दगी ............. महखाने में पाया जाता था में, शाम से ररत तक की थी ज़िन्दगी , तनहा रहना था किस्मत में मेरी , एक रात  तू आई बनके हसीं सपना  अंधेरो में एक रास्ता बनके , लायी अपने साथ एक नयी दुनिया , मेगधनुष के उस पार की दुनिया  जिससे था में बिलकुल अंजना  तू मेरी तम्मना , तू मेरा सपना ,मेरी ज़िन्दगी है तू  तू है तो है ज़िन्दगी टी नहीं तो .........

यादो की खिड़की

जब यादो की खिड़की को खोला मेने  एक हसी जोर से आ के चहरे पे लगी थी, कुछ देर तो सहें सा गया था में , पर जब वो हसी, बारिश की बूंद बनके गिरी चहरे पर तो देखा मेने के वहा , माँ की गुदगुदी और बाबूजी का तेज़ जुला था  दादी की दिलचस्प कहानिया और दादा का एक ब्लेक एंड वाइट फोटो था, छोटी छोटी गलियों में बड़ा एक बचपन था यारो के संग रंगीन हर लमहा था. पहली सिगारेट जलने की शुर्विरता थी और उसे दोस्तों को सिखाने के चक्कर में पड़ी चपेट थी  अनजान शहर में किताबो का एक ढेर था  और प्रिन्सिपाल के केबिन की ठंडी केबिन के पीछे  मेरे महबूब के अंचल की गर्मी थी.  में तो डरा रहता था अपने भूतकाल से  पर जब मेने यादो की खिड़की को खोला  तो एक हसी जोर से आके चहरे पे लगी थी  यादो की खिड़की by Ankit Gor is licensed under a Creative Commons Attribution 3.0 Unported License . Based on a work at ankitisam.blogspot.com . Permissions beyond the scope of this license may be available at akki.gor77@gmail.com .